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Category: Excursion

चंदेरी स्थित कोषक महल की यह इमारत मध्यकालीन अफगान स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। इसका निर्माण मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी ने सन 1445 में कराया था। कहा जाता है इस इमारत का निर्माण जौनपुर के शर्की सुल्तान को पराजित करने के उपलक्ष्य में कराया गया था। कुछ इतिहासकार कालपी विजय के उपलक्ष्य में […]

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कहा जाता है कि उज्जैन को जीतने के बाद सम्राट अशोक ने यहाँ विश्राम किया था । इस कारण इसका नाम अशोकनगर पड़ा। अशोकनगर को गुना से अलग एक नए जिले के रूप में 16 वर्ष ही पूर्ण हुए है। इस तरह अभी तक यह युवा जिला ही माना जायेगा। भौगोलिक दृष्टि से यह मालवा […]

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कोटेश्वर महादेव मंदिर ग्वालियर नगर का प्रमुख और प्राचीन शिवालय है। एक देशस्थ मराठी ब्रह्माण्ड पंडित गंगाधर राव त्रयम्बक जी ने श्रीनाथ महादजी सिंधिया जी को कोटेश्वर शिवलिंग के इतिहास व् महत्ता को समझाया | जिसके बाद किले की तलहटी में इसका निर्माण मूलतः महायोद्धा श्रीनाथ महादजी शिन्दे महाराज द्वारा करवाया गया था। इसके ठीक […]

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मध्य काल में सलीम और वीरसिंह बुन्देला जैसी मित्रता की दूसरी मिशाल देखने को नही मिलती है। दतिया का वीरसिंह जू देव महल दोनो की मित्रता की अमर निशानी है। यह महल मध्य काल में बुन्देलखण्ड में निर्मित इमारतों में स्थापत्य कला की दृष्टि से से सर्व श्रेष्ठ इमारत है। इस इमारत से मेरी पहिचान […]

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There are some parts of India that once visited get into your heart and won’t go-Gwalior Fort is such a Place! Gwalior fort is an 8th century hill fort which is located at Gwalior district in the central state of Madhya Pradesh. The name of Gwalior is derived from the saint from Gwalipa- the story behind this name is […]

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तू दृढ़ता की प्रतिमूर्ति , सुरक्षा का साधन,
तू रणखोरों का का लोभ, समर का आकर्षण।
मैं भीमसिंह राणा की गौरव गाथा हूँ,
मैं उनकी अमर कीर्ति के गीत सुनता हूँ…….।

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ऐसाह और सिहोनिया मुरैना जिले की अम्बाह तहसील में प्राचीन ऐतिहासिक स्थान है। ऐसाह “ग्वालियर के तोमर वंश ” का उदगम स्थल है। ऐसाह को कभी “ऐसाह मणि” कहा जाता था। ऐसाह का मतलब ईश से है और समीप के गाँव सिहोनिया में अम्बिका देवी का मंदिर है। ईश और अम्बा ये स्थल कभी तोमर शक्ति की धुरी थे।

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अपने प्रेम को व्यक्त करने के लिए महादजी ने गन्ना बेगम के मकबरे पर फारसी में लिखवाया था, ‘आह-गम-ए-गन्ना बेग़म’, यानी गन्ना बेगम के गम में निकली आह। गन्ना नाम तो मां ने रखा ही इसलिए था कि वह गन्ने के रस से भी मीठा गाती थी। लेकिन गन्ना के यही गुण उसकी जिंदगी के […]

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चित्तौड़ गढ़ के जौहर से सभी परिचित है पर इस तथ्य को कम लोग ही जानते है कि ग्वालियर दुर्ग पर भी बड़े जौहर हुए है। गोपांचल दुर्ग का इतिहास गीत , संगीत ,कला , साहित्य के साथ साथ शौर्य , पराक्रम , त्याग , बलिदान और आत्म उत्सर्ग के उदाहरणों से भरा हुआ है। […]

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क्या आप जानते हैं , इब्नबतूता 1342ई मैं मुरेना जिले के जोरा- अलापुर आया था  जौरा ग्वालियर स्टेट के दौरान सन 1904 तक सिकरवारी का सूबा अर्थात ज़िला मुख्यालय रहा है। सन 1905 में ग्वालियर स्टेट में जिला पुनर्गठन आयोग की सिफारिश पर तंवरघार सिकरवारी ज़िले को मिलाकर एक ज़िला बनाया गया जिसका मुख्यालय जौरा […]

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सबलगढ़ का इतिहास अत्यन्त प्राचीन है। महाभारत काल मे यह क्षेत्र ” चेदि ” राजाओं के अधीन रहा। प्राचीन भारत मे यह अलग अलग काल खण्डों में क्रमशः मौर्य , कुषाण एवं गुप्त राजाओं के अधीन रहा। 8वी से 12 सदी के बीच इस क्षेत्र पर गुर्जर प्रतिहार , चंदेल और कच्छपघात वंश के राजाओं ने […]

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